3 नवंबर 2026 - 19:07
ईरान अमेरिका की धमकियों और दबाव के आगे नहीं झुकेगा: क़ालिबाफ़ 

अमेरिका की ईरान से गहरी दुश्मनी की असली वजह यह है कि ईरानी जनता इस देश के दबाव और उसकी मनमानी मांगों के सामने झुकने को तैयार नहीं है।

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालिबाफ़ ने कहा है कि ईरानी जनता दुश्मन की सैन्य धमकियों और कार्रवाइयों से डरने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता ईरान का सबसे बड़ा हथियार और भविष्य के युद्ध में सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है।

संसद के खुले सत्र में अपने संबोधन के दौरान क़ालिबाफ़ ने कहा कि अमेरिका की ईरान से गहरी दुश्मनी की असली वजह यह है कि ईरानी जनता इस देश के दबाव और उसकी मनमानी मांगों के सामने झुकने को तैयार नहीं है।

उन्होंने कहा कि ईरानी जनता ने अपनी स्वतंत्रता की चाह को दुनिया के दूसरे आज़ाद देशों के लिए भी एक मिसाल बना दिया है।

क़ालिबाफ़ के मुताबिक, ईरान की इसी दृढ़ता और प्रतिरोध ने इस्राईल और अमेरिका को परेशान कर दिया है। दुश्मन लगातार मिल रही नाकामियों के बाद कभी धमकियों तो कभी सैन्य कार्रवाई के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश करता है, लेकिन उसकी यह उम्मीद कभी पूरी नहीं होगी।

उन्होंने कहा, "दुश्मन यह समझ ले कि ईरान आत्मसमर्पण नहीं करेगा। ईरान को झुकाने का सपना उस दौर की बात है, जब देश में विदेशी ताकतों के अधीन रहने वाली सरकारें सत्ता में थीं।"

संसद अध्यक्ष ने कहा कि अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को पिछले दो थोपे गए युद्धों से यह समझ आ जाना चाहिए कि अब दूसरे देशों पर मनमानी करने और अपनी शर्तें थोपने का दौर खत्म हो चुका है।

उन्होंने कहा कि ईरान के सर्वोच्च कमांडर ने संभावित दुश्मन के हमले का जवाब देने की सैन्य रणनीति पहले ही तय कर दी है। यदि दुश्मन ने कोई गलत कदम उठाया तो ईरान का जवाब ऐसा होगा जिसकी वह कल्पना भी नहीं कर सकेगा।

क़ालिबाफ़ ने चेतावनी दी कि ईरान जवाबी कार्रवाई में भौगोलिक सीमाओं की पाबंदी नहीं करेगा और दुश्मन की सैन्य तथा आर्थिक ताकत को भारी नुकसान पहुंचाएगा।

उन्होंने क्षेत्रीय देशों को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान हर समय युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है और उसकी उंगली ट्रिगर पर है। इसके बावजूद ईरान ने अमेरिकी पक्ष को एक मजबूत और समझदारी भरा जवाब दिया है। अब गेंद अमेरिका के पाले में है कि वह युद्ध को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।

उन्होंने आगे कहा कि ईरान सैन्य और जमीनी स्तर पर अपनी रक्षा के लिए सर्वोच्च तैयारी की स्थिति में है। अगर वॉशिंगटन ने दोबारा कोई रणनीतिक गलती की तो उसे एक बिल्कुल नए युद्धक्षेत्र का सामना करना पड़ेगा और वह आज से भी अधिक मुश्किल स्थिति में फंस जाएगा।

अपने संबोधन के अंत में क़ालिबाफ़ ने राष्ट्रीय एकता पर जोर देते हुए कहा कि ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी जनता की एकजुटता है।

उन्होंने कहा, "मैं यहां एक बार फिर जोर देकर कहना चाहता हूं कि राष्ट्रीय एकता को बनाए रखना अगले युद्ध में हमारा सबसे शक्तिशाली हथियार और दुश्मन को हमले से रोकने का सबसे प्रभावी साधन होगा।"

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